सैकड़ों वर्ष पुराना मेला मकनपुर लगातार खो रहा अस्तिव
फोटो 2 परिचय- वसंत मेला मकनपुर में लगे भांति-भांति के झूले फोटो 3 परिचय- मकनपुर में सजा 607 वां प्राचीन वसंत - 1952 से यूपी सरकार कर रही मेला, 1923 से बना था बायलाज - आनलाइन बिक्री और डिजिटलीकरण से साल दर साल कम हो रही आमदनी राहुल त्रिपाठी बिल्हौर। एतिहासिक मेला मकनपुर पर बदलते परिवेश का सर्वाधिक असर आमदनी पर पड़ा है। दशकों तक मेला की आमदनी से जहां मकनपुर में कई प्रकार के विकास काम होते रहे हैं, वहीं बीते वर्षों से मकनपुर मेला की आमदनी लगातार घट रही है। मेला से गाय, भैंस, बकरी, ऊंट, टाकीज, बैल बाजार, भैंसा बाजार के खरीददार-विक्रेता सहित गुदड़ी बाजार, कालीन बाजार, बक्शा सहित कई प्रकार की पारंपरिक दुकान आना बंद होने से आमदनी की बजाय घाटे में जा रही है और तो और आनलाइन बाजार, मोबाइल-टीवी ने भी मेला मकनपुर की कमर तोड़ दी है। कई वर्षों तक मेला कमेटी के सदस्य रहे साहिर हुसैन जाफरी ने बताया कि 1923 में जब सूबा प्रांतों में बटा था, तब मेला का बायलाज बना था, अवध-आगरा प्रांत के अधिकारी इसका संचालन करते थे मोटी आमदनी होती थी। वैसे तो वसंत मेला मकनपुर तो 607 वर्षों से होता आ रहा है, लेकिन 1952...